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सुंदरबन में ट्रॉलरों के पहिए थमे, संसद में गूंजी विरोध की आवाज
कोलकाता। बंगाल में गहराते एलपीजी संकट ने अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक गतिरोध का रूप ले लिया है। रसोई गैस की किल्लत का असर घरों के चूल्हों से निकलकर अब समुद्र की लहरों, सरकारी स्कूलों और देश की संसद तक जा पहुंचा है। एक तरफ जहां बंगाल के सुंदरबन में सिलेंडरों के अभाव में सैकड़ों मछली पकडऩे वाले ट्रॉलरों का संचालन ठप हो गया है, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को संसद परिसर में पार्टी की महिला सांसदों ने जोरदार प्रदर्शन कर गैस आपूर्ति के दावों को जमीनी हकीकत से कोसों दूर बताया। दिल्ली में लोकसभा के बाहर महुआ मोइत्रा, माला रॉय, शताब्दी रॉय और डोला सेन सहित तृणमूल की दिग्गज महिला नेताओं ने प्लेकार्ड हाथों में लेकर केंद्र की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। सांसदों का आरोप है कि पेट्रोलियम मंत्रालय के ढाई दिन में डिलीवरी के दावे पूरी तरह खोखले हैं, जबकि असलियत में बंगाल के उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए 8 से 10 दिनों तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
महुआ मोइत्रा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में गैस के लिए हाहाकार मचा है और मंत्री को खुद गलियों में उतरकर हकीकत देखनी चाहिए। गैस संकट की सबसे मारक तस्वीर सुंदरबन के तटीय इलाकों से सामने आई है। यहां गहरे समुद्र में जाने वाले ट्रॉलरों के लिए व्यावसायिक गैस अनिवार्य है, क्योंकि मछुआरों को 15-15 दिनों तक समुद्र में रहना पड़ता है। स्थानीय मछुआरे रतन दास के मुताबिक, गैस न मिलने के कारण दर्जनों ट्रॉलरों की रवानगी टालनी पड़ी है, जिससे मत्स्य उद्योग को लाखों का नुकसान हो रहा है। यही नहीं, उत्तर 24 परगना के बशीरहाट में गरीबों को सस्ता भोजन देने वाली माँ कैंटीन पिछले तीन दिनों से बंद है, जिससे करीब 300 लोगों के निवाले पर संकट आ गया है। कई सरकारी स्कूलों में स्थिति इतनी विकट हो गई है कि मिड-डे मील पकाने के लिए रसोइयों को फिर से लकड़ी के चूल्हों और धुएं का सहारा लेना पड़ रहा है। किल्लत के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों से गैस की कालाबाजारी की खबरें भी प्रशासन की नींद उड़ा रही हैं। जयनगर और विष्णुपुर जैसे इलाकों में अवैध रिफिलिंग और खाली गोदामों ने आम जनता के गुस्से को भड़का दिया है।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया के युद्ध का हवाला देते हुए स्थिति को नियंत्रण में बताया है और राज्यों से कालाबाजारी पर नकेल कसने की अपील की है। प्रतिक्रिया स्वरूप, कोलकाता में एनफोर्समेंट ब्रांच ने मोर्चा संभाल लिया है। अधिकारी लगातार गैस गोदामों और वितरण केंद्रों पर छापेमारी कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी नई एसओपी के बाद अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस कृत्रिम किल्लत और कालाबाजारी के सिंडिकेट को तोडऩे में कितना कामयाब हो पाता है।